लफ्जों के इस भँवर में
उलझें है, कुछ तारे।
कोशिश उभरने की मग़र
डुबाती हैं यादें, तेरे बारे।।
उलझें है, कुछ तारे।
कोशिश उभरने की मग़र
डुबाती हैं यादें, तेरे बारे।।
एक हल्की-सी मुस्कान
इतनी आशावान,
जोहे बाट समां की
दुख हो सब नाशवान।
पर घाव भरने नहीं देती
नमक-सी ये यादें, तेरे बारे.....
समझ से परे कोई रंजिश थी
या साज़िश,
अनल ढूंढती है अब तो जलने को
खुद माचिस।
हृदय-विदारक करती जाती
जहर-सी ये यादें, तेरे बारे........
नद को असीम से मिलाने
तारों को फिर से आसमां दिलाने।
झकझोरती 'विजय' को ये बातें, तेरे बारे.........
©®विजय खनगवाल
इतनी आशावान,
जोहे बाट समां की
दुख हो सब नाशवान।
पर घाव भरने नहीं देती
नमक-सी ये यादें, तेरे बारे.....
समझ से परे कोई रंजिश थी
या साज़िश,
अनल ढूंढती है अब तो जलने को
खुद माचिस।
हृदय-विदारक करती जाती
जहर-सी ये यादें, तेरे बारे........
नद को असीम से मिलाने
तारों को फिर से आसमां दिलाने।
झकझोरती 'विजय' को ये बातें, तेरे बारे.........
©®विजय खनगवाल

Nice
ReplyDeleteThanks a lot
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